Friday , 15 December 2017
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उत्तर प्रदेश में चुनाव और गुलामी की दास्ताँ का परिणाम

उत्तर प्रदेश में चुनाव और गुलामी की दास्ताँ का परिणाम
उमेश बाबू की कसम से …..
EVM मशीन में गड़बड़ी पहले भी साबित हुई थी और इस चुनाव में भी हुआ | पहले भी कुछ लोगों ने हरने के इरादे से अद्लातों में EVM मशीन में गड़बड़ी की शिकायत की थी और वे सफल भी हुए | राजनितिक पार्टियों ने कोई रूचि नहीं दिखाई | पिचाले पांच वर्षों में सुरक्षित चुनाव क्षेत्रों से चुनकर आने वाले 84 विधायकों ने उत्तर प्रदेश में कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं किया | सपा की बेवकूफी का फायदा लेना चाहते थे BSP के लोग | कांग्रेस ने सत्ता भाजपा को सौपने के बाद सिर्फ दिखावे के लडती है | ये तीनो कारण – EVM मशीन की गड़बड़ी पर चुप्पी, विधान सभा में प्रतिनिधित्व नहीं करना, सपा की नाकामियों के बदले मुफ्त में जनता से वोट लेना – ने बौद्धिक गुलामी और कर्म-विहीनता की हदे पार कर दी हैं | मनुवाद विजयी हो गया और हम उसे गलियां देते रहे,
नोटबंदी, बेरोजगारी, महंगाई, उत्पीडन, गरीबी, भ्रष्टाचार, आदि से बुद्धिजीवी और मुर्ख दोनों परेशान हैं और अपनी परेशानी को दूर करने का जो रास्ता चुना वह उत्तर प्रदेश के चुनाव में दिख गया | मानिये या मत मानिये लेकिन सच यह यह है कि मनुवाद ने हमें जकड लिया है और हम जिस मुर्खता के साथ अपने राजनितिक प्रतिनिधित्व का जिम्मा देते हैं उसका परिणाम हमारे सामने है | डा आम्बेडकर ने हमें शिक्षित होने के लिए कहा था और हमारी राजनितिक शिक्षा का परिणाम 2014 और 2017 के चुनाव में दिख गया |

मैं सभी लोगों से निवेदन करता हूँ गुलामी से बहार निकलने के लिए जो रास्ता चुना है उसपर पुनर्विचार करें | समय, समाज और विज्ञानं बहुत आगे बढ़ चूका है और हम पीछे जा रहे हैं | दोष मूर्खों का नहीं है बल्कि उनका है जो बुद्धिमान और नेता हैं | समाज के बुद्धिमान और नेता अगर पुनर्विचार करें और अपनी गलतियों को सुधार लें तो मामला संभल सकता है | इस कदम में बजट और आर्थिक विकास के मुद्दे पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अंतर्गत चुने हुए जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाना और उसका समाधान निकलना | अगर संविधान की इस गरिमा का हमने सम्मान नहीं किया तो वह सब कुछ होगा जो पहले कभी नहीं हुआ और हम उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार में अभी तक जो हुआ है उससे आंकलन लगा सकते हैं – सरकारी नौकरी गयी, बजट में आबंटित पैसा गया, साधन-संपत्ति में हिस्सा गया, अदालतों के निर्णय का सम्मान गया, लोक सभा और विधान सभाओं में प्रतिनिधित्व गया, शिक्षा और स्वास्थ्य के निजीकरण में हमारी शिक्षा और स्वास्थ्य गया, ………… |

मिडिया ने पिछले दिनों मनुवाद के पक्ष में जो हवा बनाई उसके बाद EVM में गड़बड़ी दब गयी और भाजपा जित गयी | वही कहानी दुबारा हुई और हम हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे |

डाॅ. मनीषा बांगर

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