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देश से नहीं, देश में आजादी जरूर मांगेंगे, यह हमारा हक्क भी और अधिकार भी…

देश से नहीं, देश में आजादी जरूर मांगेंगे, यह हमारा हक्क भी और अधिकार भी…

        1947 में हमे आजादी मिली, और हम आजाद हो गये, फिर 26 जनवरी में हमे संविधान मिला और हमे इस देश के अमानवीय ब्राह्मणी व्यवस्था से आजादी मिटकरीमिली. ये दुसरी आजादी है.दोनों आजादी के लिए हमे बहुत संघर्ष करना पडा. दो दुश्मन थे. एक अंदर था और दुसरा बाहर का विदेशी. हम उनसे लढे. अलग अलग मोर्चे बनाकर लढे. बहुत कुर्बानिया दी.उसमे शहीद भगतसिंग और उनके साथीयों ने अपना बलिदान दिया. गांधी, नेहरू अपने परिवार के साथ कई बार जेल में गये. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विदेशी ब्रिटिश सरकार का लुटारू चेहरा दुनिया के सामने ला रहे थे. अंदर के दुश्मनों के खिलाप भी जंग लढ रहे थे.तो और भी कुछ लोंग थे, जो विदेशी सरकार को साथ दे रहे. उनके तलवे चाट रहे थे, उनके पेंशन पर पल रहे थे. आज वही तलवे चाटनेवाले देश की सत्तापर आये है, और हमारा संविधान, संवैधानिक अधिकार को खतम कर रहे है. इसलिए दुसरी आजादी की बात हो रही है. जो देश से नही, देश में आजादी की है….!

        देश से नही, देश में आजादी जरूर मागेंगे, यह हमारा हक्क भी और अधिकार भी….!

        अगर इस देश के दलित, ओबीसी, आदीवासीयों को आजादी के 75 साल के बाद भी, आजादी के अमृतकाल में भी आरक्षण के सहारे की जरुरत पडती है, तो सवाल यह उठता है, की आखिरकार ये आजादी ने हमे दिया क्या है ?
       अगर आजादी मिली तब का अगडा समाज आज पिछड गया हो और वो भी जीने के लिए आरक्षण को ही अपना सहारा मानता हो, तब भी यह ही सवाल उठता है की, ये आजादी ने हमे दिया क्या है ?
      अगर इस देश की मेहनतकस जनता हर चीज का निर्माण करती हो, खेत जोतती हो, धान पैदा करती हो,पर उनको दो वक्त की रोटी नशीब ना हो, कपडा बनाती हो, पर तन ढाकने के लिए उनके पास चिंधी भी ना हो. या इमारत, मकान बनाती हो, पर शर पे छत ना हो, तब सवाल जरूर उठता है की, इस आजादी ने हमे दिया क्या है ?
        देश में हजारो, लाखो स्कुल, कॉलेज हो, दवाईयों की लाखो फॅक्टरी हो, बडे बडे हॉस्पिटल भी हो, उसमे उतने ही बडे डॉक्टर हो, पर हम अपने बच्चे को शिक्षा नही दे पाते हो,और दवा न मिलने से मरते है , तब फिर ये सवाल उठता है की, हमे इस आजादी ने दिया क्या है ?
         हम काम करना चाहते है, हमारे पढे लिखे बच्चे रोजगार मागते हो, रोजगार मिला तो काम का उचित दाम मागते है, तो हम गलत कहा से है ? तब हमे अर्बन, रुरल नक्षली कहा जाता, तब हमारे सामने सवाल खडा होता है की, इस आजादी ने हमे दिया क्या है ?
        हम धान लगाते है, अनाज पैदा करते है, और उसे उचित दाम मागते है, तो हम गलत कैसे है ? और जब हम इसके बारे में सोचते है, तो फिर वही सवाल सामने आ जाता है की, हमे इस आजादीने दिया क्या है ?
         हम मेहनतकस जनता दो वक्त की रोटी को मौताज रहते है, पर हमारे खून पुसीने की कमाई से अदानी, अंबानी जैसे उद्योगपती दुनिया के सबसे अमीर आदमी कैसे बन जाते है ? यह सवाल हम हुकूमत से करते, तब हम देशद्रोही कैसे हो जाते है ? यह भी सवाल हमे आजादी के बारे में सोचने पर मजबूर कर देता है ? और हम खुद को ही सवाल करते है की, इस आजादी ने हमे दिया क्या है ?
हमारे ही देश में हमारी बहु, बेटीया सुरक्षित नही हो, वो अत्याचार और बलात्कार की शिखार होती हो, जातीवाद के नामपर हमारे साथ अमानवीय व्यवहार होता हो, और हमे बोलने की भी आजादी नही हो, तब हम जरूर सोचेंगे की, हमे इस आजादीने दिया क्या है ?
        देश की 80 करोड जनता दो किलो फ्री चावल के लिए राशन दुकानपर लाईन लगा रही हो , और इसी जनता की मेहनत की कमाई देश के कुछ उद्योगपती और राजनेता लूट रहे है, देश को बर्बाद कर रहे है, तब हम चूप कैसे रहेंगे ? तब हम देश से नही, देश में आजादी जरूर मागेंगे….!
         इस देश की मिठी में हम पैदा हुए, हमारे दादा, परदादा और पर परदादा भी यही मिठी में पैदा हुए, और आज भी इसी देश की मिठी में मिठी बनकर रह गये है. इसलिए यह देश हमारा है. देश का संविधान और लोकतंत्र भी हमारा है. हम देश से प्यार भी करते है. तो इस देश में आजादी हम जरूर मागेंगे, यह हमारा हक्क भी है,और अधिकार भी…!

– राहुल गायकवाड,
(महासचिव, समजवादी पार्टी, महाराष्ट्र प्रदेश)

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