• 59
  • 1 minute read

पीठ, मठ,आश्रम क्या अय्याशी और यौन शोषण के अड्डे है……?

पीठ, मठ,आश्रम क्या अय्याशी और यौन शोषण के अड्डे है……?

एक दशक के निरकुंश सत्ता; संघ और भाजप ने धर्म के ठेकेदारी पर भी कब्जा किया !

        मठ,पीठ, आश्रम और  उत्पत्ती , निर्माण लुटमार, यौन शोषण, अय्याशी के लिये ही हुयी है, और हजारो सालों से यही हो भी रहा है. लुटमार, यौन शोषण और अय्याशी के अड्डे बने हुये है मठ, पीठ, और आश्रम. आसाराम बापू, राम रहीम के आश्रम उसके उदाहरण है. छोटे मोठे उदाहरण तो हमारे सामने रोज आते रहते है. बाकी वैदिक ब्राह्मणी धर्म व्यवस्था मे शंकराचार्य और उनके पीठ, मठ से हिदू समाज की आस्था, अस्मिता और भावनाये जुडी है. कई बार उसे ठेस पोहचती है, पर भी हिंदुयों का विश्वास इस व्यवस्था पर कायम रहा. शंकराचार्य तो इस आस्था और भावनायों का प्रतिक है. बस अब उसके के ही यौन शोषण और अय्याशी का खुलेआम पर्दाफाश हो रहा है. अब बचा क्या है ? ” अब की बार काशी, मथुरा ” यह हिंदुत्व का एक नारा है, इसी काशी स्थित केदार घाट पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मठ और पीठ है. उसमे अय्याशी की सारी सुविधा है, जो अवैध रूप से बनायी गयी है. इसी पीठ मे महिलाये और छोटे छोटे बच्चे जो धर्म की शिक्षा लेने आते है , उनके साथ गलत व्यवहार किया जाता है. उनका यौन शोषण हुआ है.  अब शंकराचार्य और उनके शिष्योंपर मुकदमा भी हुआ है. मामला अदालत मे चल रहा है. 
          शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदपर FIR दाखिल हुआ. आसाराम और राम रहीम सेक्स कांड के प्रकरण मे ही जेलो मे बंद है. अगर कोई भी गलत करता है, भला वो कोई भी होने दो, किसी भी जाती का, किसी भी धर्म का, पंथ का भारतीय संविधान और कानून के सामने समान है. इसलिये आसाराम,राम रहीम जैसे अपराधी सलाखों के पिछे है. अगर इस देश मे  संविधान का राज नहीं होता, तो यह सब अपराधी इतना बडा अपराध करने के बाद भी जेल मे नहीं होते. मनुस्मृती का कानून और विधान इन पाखंडियों को अपराध करने की अनुमती देता है. इसलिये देश के सब पाखंडी साधू, संत, मठाधीश, पिठाधीश, सारे शंकराचार्य, मंदिरो के पुजारी, पुरोहित सारे के सारे संविधान का विरोध करते है, और मनुस्मृती का विधान चाहते है. जो उन्हे अय्याशी, योंन शोषण, और धर्म के नामपर लूटमार करने की अनुमती देते है.
          लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने का जिम्मा केंद्र की सरकार का है. पर सरकार ही खुद्द लोकतंत्र और संविधान को असुरक्षित करने का काम पाखंडी साधू, संत, कथावाचक आणि शंकराचार्यो के माध्यम से कर रही है. काशी पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धर्म का काम कम और संविधान, लोकतंत्र को विरोध जादा करते है. यह सरकार प्रायोजित प्रोग्राम भी रहता है. यह साधू,संत और शंकराचार्य राजनीति मे भी सक्रिय भूमिका निभाते है. संघ,भाजप के हिंदुत्व राष्ट्र निर्माण के अजेंडे को हर तरह से मदत भी करते है. मोदी सरकार बनाने के लिये शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 2014 से लगे थे. समय समय पर योगी और मोदी की सरकारे बनाने मे उनका सक्रीय सहभाग भी रहा है. पर राम मंदिर निर्माण के समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और चारो पीठ के शंकराचार्यो के बीच मे मतभेदों की एक लकेर खीच गयी है. संघ, भाजप या मोदी सरकार शंकराचार्यो को सही सन्मान नहीं दे रही है, यह आरोप राम मंदिर निर्माण के वक्त से सभी शंकराचार्यों का है. और वो सही भी है.
         मनुवादी व्यवस्था का असली नाम वैदिक धर्म है. और देश मे चारो पीठ के शंकराचार्य वैदिक धर्म के ठेकेदार है. पर एक दशक के निरकुंश सत्ता ने संघ और भाजप ने धर्म के ठेकेदारी पर भी कब्जा किया है. योगी बाबा तो किसी साधू, संत और शंकराचार्य को मानने के लिये ही तयार नहीं. धर्म के ठेकेदारी मे अब संघ किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहता और पीठ के चारो शंकराचार्य पिछे हटना नहीं चाहते. धर्म के ठेकेदारी के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बाबा योगी और चारो शंकराचार्य के बीच का यह संघर्ष है, जो आज दिख रहा है. इसी संघर्ष का ही नतिजा है की अविमुक्तेश्वरानंद और उनके साथीयों के खिलाप FIR दाखल हुआ हे. ऐसे तो पीठ और मठ मे कई सालो से ये नीच कृत्य हॊ रहे है. इसी मठ और आश्रम मे सन २००० मे भावना द्विवेदी नाम की एक लेखिका कुछ महिने रही है. तब उसने देखा था की, मठ मे गैर कृत्य हॊ रहे है. महिला और बच्चो का योंन शोषण हॊ रहा है. पर लेखिका होते हुये भी उसने अपनी कलम नहीं चलायी, या जबान नहीं खोली. आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के लिये वो २६ साल के बाद मठ के गैर कृत्य के बारे मे बोल रही है.
          पीठ मे गैर कृत्य का मुद्दा बहुत अहम मुद्दा है. पर वो राजनीति से प्रेरित है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता को और भगवे परिधान को अविमुक्तेस्वरानंद आव्हान नहीं देते, तो मठ और आश्रम मे जो चल रहा है, वो कभी बाहर नहीं आता. हिस्ट्रीशिटर आशुतोष पांडे ऊर्फ महाराज नाम से परिचित एक गुंडे का इस्तेमाल इस प्रकरण मे हुआ है. मठ मे चल रहे गैर कृत्य का भांडा फोड आशुतोष पांडे ने किया है. यह प्रकरण अदालत ले जाने मे भी वो ही है. और यह सब पीठ के की सत्ता के लिये हो रहा है. आशुतोष पांडे जैसे अय्याशबाज और हिस्ट्रीशिटर – जिनके खिलाफ २७ मामले दर्ज है – के माध्यम से योगी आदित्यनाथ अपने व्यक्ती को काशी पीठ पर बिठाना चाहते है. पर प्रकरण अब न्याय प्रविष्ठ हो गये है. अब ना मोदी, योगी और भागवत की चलेगी. बस अब कानून ही चलेगा. अब हिंदू समाज की जितनी भी संस्थाये है. वो सब उसमे कुद पडी है. कोई योगी के समर्थन मे तो कोई शंकराचार्य के समर्थन कर रहे है. अन्य एक संविधान और लोकतंत्र विरोधी शंकराचार्य रामभद्राचार्य योगी के समर्थन मे खुलेआम उत्तरे है. धर्म का मामला है, उसे कैसे निपटना चाहिए , इतना भी इन धर्म मार्तंडो को नहीं समजता. 
        
                देशभर के सभी मठ,  और आश्रमो की निगरानी होनी चाहिए….
      
           मंदिरो मे बलात्कार होने की घटना आये दिन सामने आती है. आश्रमो मे महिला और बच्चे सुरक्षित नहीं है. उन्हे योंन शोषण के शिकार होना पडता है. पर मामला धर्म का, मंदिर का रहता है, इसलिये चूप बैठना पडता है. गैर कृत्य होने के बावजुद अंधभक्त बलात्कारी साधू, संन्यासी, बाबा, बापू जैसे दरिंदो को बचाने की कोशिश करते है. हम अबतक भुले नहीं . असिफा के साथ कई दिन मंदिर मे बलात्कार करने के बाद उसको मार दिया. पर भगवाधारी इन बलात्कारीयों को बचाने के लिये लोग रस्तेपर उतर आये. मोर्चे निकालकर पोलिस पर दबाव बनाने का काम भी किया गया. दरिंदा आसाराम के बचाव के लिये भी अंधभक्तो ने आंदोलन किया. और आश्चर्य की बात यह है की,उसमे महिला बडी संख्या मे सामिल थी. राम रहीम के वक्त मे भी यही हुआ था. अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बचाने के लिये भी अंधभक्तो की फौज खडी हॊ सकती है.
            शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पीठ और आश्रम मे जो भी हुआ, वो बहुत ही नीच कृत्य है. हिंदू समाज छोडकर अन्य कॊई भी समाज उसका समर्थन नहीं कर सकता. जहाँ धर्म के शिक्षा कार्य होना चाहिए, वहा योंन शोषण कांड हॊ रहे है. FIR दाखल हॊ चुके है. उसकी प्राथमिक पुस्ति भी हुई है. पर जो धर्म पीठ पर बैठे भगवाधारी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चेहरे पर शिकंज नहीं है. ऐसा व्यक्ती पूजनीय और आदर्श कैसे हॊ सकता है ? समाज की आस्था, अस्मिता और भावना से खिलवाड करने का हक्क, अधिकार भगवाधारीयों को किसने दिया ? क्या यह सवाल हिंदू समाज कभी अपने अंतरात्मा पूछ सकता है ? नहीं पूछ सकता , यह उसका जवाब है. धर्म व्यवस्थाने हिंदू समाज के सोच को मार दिया है. उसके सोच की नसबंदी वैदिक धर्म ग्रंथो ने की है. धर्म के नामपर अधर्म   मनमस्तिक मे ठुसठुसकर भरा है. इसलिये अधर्म को ही वो धर्म मान भी रहा है. इसलिये सारा  गोबर और गोमूत्र को पवित्र मानकर उसे खा और पी रहे है. यह हकिकत है.
……………
 
राहुल गायकवाड,
महासचिव समाजवादी पार्टी,
महाराष्ट्र प्रदेश
0Shares

Related post

महाडचा धर्मसंगर आणि समाजभान!

महाडचा धर्मसंगर आणि समाजभान!

महाडचा धर्मसंगर आणि समाजभान! महाड येथे केलेल्या चवदार तळ्याचा मुक्तीसंग्राम, ज्याला डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी धर्मसंगर…
श्री एकविरा यात्रेनिमित्त पालखी प्रमुखांची बैठक; लोणावळा ग्रा. पोलीस ठाणेचे नियोजन, भक्तांच्या वाहनांना टोल माफ

श्री एकविरा यात्रेनिमित्त पालखी प्रमुखांची बैठक; लोणावळा ग्रा. पोलीस ठाणेचे नियोजन, भक्तांच्या वाहनांना टोल माफ

श्री एकविरा यात्रेनिमित्त पालखी प्रमुखांची बैठक; भक्तांच्या वाहनांना टोल माफ महाराष्ट्रातील लाखो भाविकांचे श्रद्धास्थान असलेल्या वेहेरगाव…
अजित पवारांच्या मृत्यूची चौकशी होत नसेल, तर सर्वसामान्यांचे काय ? चिंता व चर्चा करायची तर यावर झाली पाहिजे…..!

अजित पवारांच्या मृत्यूची चौकशी होत नसेल, तर सर्वसामान्यांचे काय ? चिंता व चर्चा करायची तर यावर…

कायद्याच्या राज्याची भाषा करणे, सत्ताधाऱ्यांना जाब विचारणे आज गुन्हा ठरत असला तरी देशहितासाठी तो केलाच पाहिजे….!…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *