• 64
  • 1 minute read

मेरी जुस्तजू

मेरी जुस्तजू

मरते समय लिखूंगा “आंबेडकर” नाम हथेली पे,
मुझे इस दुनिया से खाली हाथ नहीं जाना।
 
ज़ुल्म की रात बहुत लम्बी सही, डर कैसा,
सूरज का वारिस हूँ, मुझे खौफ़ में नहीं जाना।
 
जिसने इंसान होना सिखाया किताबों से,
उसके रास्ते से हटकर मुझे कहीं और नहीं जाना।
 
भूख, तिरस्कार, ग़ुलामी का इतिहास पढ़ा है,
इसलिए सर झुकाकर किसी दर पे नहीं जाना।
 
मेरे लहू में संविधान की स्याही बहती है,
झूठे देवताओं के चरणों में नहीं जाना।
 
मैंने देखा है क़लम को तलवार बनते,
अब किसी भी हाल में खामोश नहीं जाना।
 
जो बराबरी, इंसाफ़ और बुद्धि का रास्ता है,
उसे छोड़कर मुझे जन्नत भी नहीं जाना।
 
भीमा कोरेगांव के रण में जिनकी तलवारों ने इतिहास मोड़ा,
उनके वंशज होकर डर के साए में नहीं जाना।
 
नाम मेरा मिट भी जाए तो ग़म नहीं है मुझे,
“बाबासाहब आंबेडकर” के ख़याल से जुदा होकर नहीं जाना।
 
कांबलेसर 
 
 
 
 
 
 
0Shares

Related post

राष्ट्रीय हितावर मात करून शरद पवारांचा सत्तेचा मोह सांभाळत राज्यसभेची उमेदवारी…..!

राष्ट्रीय हितावर मात करून शरद पवारांचा सत्तेचा मोह सांभाळत राज्यसभेची उमेदवारी…..!

राजकीय समीक्षक पवारांचे आर्थिक लाभार्थी असल्याने सहा दशकांच्या राजकीय कार्यकाळाची समिक्षा होत नाही…?      …
आंबेडकरी चळवळीला संविधान, लोकशाही विरोधी धर्मांध शक्तींच्या दावणीला बांधण्याच्या बदल्यात ज्योती वाघमारेंना राज्यसभा

आंबेडकरी चळवळीला संविधान, लोकशाही विरोधी धर्मांध शक्तींच्या दावणीला बांधण्याच्या बदल्यात ज्योती वाघमारेंना राज्यसभा

प्रा. ज्योती वाघमारे यांची निवड : आंबेडकरी चळवळीचा वैचारिक पाया मोडीत काढण्याच्या नियोजित योजनेचा व्यावहारिक भाग!…
असंघटित कामगार आणि चार लेबर कोड

असंघटित कामगार आणि चार लेबर कोड

असंघटित कामगार आणि चार लेबर कोड    देशभर कामगारांचा प्रचंड विरोध असतानाही अखेर सरकारने चार लेबर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *