• 112
  • 1 minute read

मेरी जुस्तजू

मेरी जुस्तजू

मरते समय लिखूंगा “आंबेडकर” नाम हथेली पे,
मुझे इस दुनिया से खाली हाथ नहीं जाना।
 
ज़ुल्म की रात बहुत लम्बी सही, डर कैसा,
सूरज का वारिस हूँ, मुझे खौफ़ में नहीं जाना।
 
जिसने इंसान होना सिखाया किताबों से,
उसके रास्ते से हटकर मुझे कहीं और नहीं जाना।
 
भूख, तिरस्कार, ग़ुलामी का इतिहास पढ़ा है,
इसलिए सर झुकाकर किसी दर पे नहीं जाना।
 
मेरे लहू में संविधान की स्याही बहती है,
झूठे देवताओं के चरणों में नहीं जाना।
 
मैंने देखा है क़लम को तलवार बनते,
अब किसी भी हाल में खामोश नहीं जाना।
 
जो बराबरी, इंसाफ़ और बुद्धि का रास्ता है,
उसे छोड़कर मुझे जन्नत भी नहीं जाना।
 
भीमा कोरेगांव के रण में जिनकी तलवारों ने इतिहास मोड़ा,
उनके वंशज होकर डर के साए में नहीं जाना।
 
नाम मेरा मिट भी जाए तो ग़म नहीं है मुझे,
“बाबासाहब आंबेडकर” के ख़याल से जुदा होकर नहीं जाना।
 
कांबलेसर 
 
 
 
 
 
 
0Shares

Related post

कोणीतरी हे सांगायची गरज होती. काल राहूल गांधींनी ते रोखठोक सांगून टाकलं.

कोणीतरी हे सांगायची गरज होती. काल राहूल गांधींनी ते रोखठोक सांगून टाकलं.

कोणीतरी हे सांगायची गरज होती. काल राहूल गांधींनी ते रोखठोक सांगून टाकलं. तुम्ही म्हणजे देश नाही.…
भाजपाच्या वकिलाने बौद्ध महिलेची क्रूर हत्या केली…

भाजपाच्या वकिलाने बौद्ध महिलेची क्रूर हत्या केली…

भाजपाच्या वकिलाने बौद्ध महिलेची क्रूर हत्या केली… पुणे: चंदननगर भागात बौद्ध महिला पुनम मूण (वय 35…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *