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ट्रम्प के विरोध बावजुद भारतीय वंश के जोहारान ममदानी समाजवाद का झेंडा गाढकर बने न्यूयार्क के महापौर…..!

ट्रम्प के विरोध बावजुद भारतीय वंश के जोहारान ममदानी समाजवाद का झेंडा गाढकर बने न्यूयार्क के महापौर…..!

न्यूयॉर्क के प्रथम नागरिक जोहारान ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री और गुठनिरपेक्ष देशों के नेता नेहरू, उनके विचार और नितियों को किया याद.....!

            सलाम बॉम्बे, कामसूत्र सिनेमा की निर्माती मीरा नायर और प्रोफेसर मुहम्मद ममदानी के चिरंजीव जोहारान ममदानीने न्यूयार्क शहर के महापौरपद का चुनाव भारी मतों से जिता है. अमेरिका मे साधारणतः डेमोक्रट्रिक और रिपब्लिकन पार्टी के बीच चुनाव होते है. पर इस चुनाव मे डेमोकक्ट्रिक उमेदवार जोहारान का मुकाबला करने के लिये राष्ट्रपती डोनाल्ड ट्रम्प को अपने रिपब्लिकन पार्टी के लिये उमेदवार भी नहीं मिला. एक अपक्ष उमेदवार अंद्रो कुमो को ट्रम्प और उसकी रिपब्लिकन पार्टीने अपना उमेदवार बनाया. तब भी न्यूयार्क की जनताने जोहारान को जिता दिया. जोहारान की जीत और अंद्रो कुमो की हार केवल एक महापौरपद की हार, जीत नहीं है. ये जीत समाजवादी विचारों की जीत है, और मोदी को अपने उंगली पर नचानेवाले साम्राज्यवादी डोनाल्ड ट्रम्प की हार है.
           नरेंद्र मोदी को अपने उंगलीपर नचानेवाले ट्रम्प को उनके अपने शहर मे हारानेवाले जोहारान ममदानी भारतीय वंश और गुजरात के है. जोहारान के पिताजी मुहम्मद ममदानी गुजराती, तो उनकी माँ मीरा नायर पंजाबी है. पर विचारों से ये तिन्हो भी समाजवादी है. जोहारान भारतीय मूल के है, पर न्यूयार्क की जनता ने जोहारान को उसका वंश, जात , धर्म और देश देखकर वोट नहीं दिया. बल्की उसकी विचारधारा और सोच को देखकर वोट दिया. इसलिये जोहारान की जीत समाजवाद की जीत है. दुनिया के प्रगत देश के नागरिक वंश, धर्म,जाती और वर्ण को दिमाग से निकालकर सोचते है, जो हमारे देश मे ये नहीं होता. यह हमारे पिछाडेपण एक मुख्य कारण है. हमे भी यह सोच रखना जरुरी है. उसमे देश हित है.
           दुनिया के बडे शहरो मे न्यूयार्क शहर का नाम बहुत उपर है,और ट्रम्प भी इसी शहर से आते है. अपने शहर का महापौर समाजवादी विचारों का और भारतीय मुल्क का नहीं होना चाहिए, ये अजेंडा पुरे चुनाव मे ट्रम्पने चलाया. इसलिये अमिरेका के उद्योगपती, भांडवलदारों को ट्रम्पने अपने साथ कर लिया. इतना ही नहीं इस चुनाव मे डेमोकट्रिक पार्टी के समर्थक उद्योगपतीयों का भी समर्थन ट्रम्पने लिया. पर न्यूयार्क के जनता ने सबको हाराकार जोहारान को जिताया.
           जोहारान भारतीय मूल का है, जोहारान मुस्लिम भी है, यह भी प्रचार मोदी, शहा, योगी और राज ठाकरे स्टाईल मे किया गया. भारतीय मूल के धर्मांध मोदी भक्तो, अंधभक्तों का समर्थन हासील किया, संघ, भाजप धर्म का इस्तेमाल हर चुनाव मे करते है, ट्रम्प और उसके गँग ने भी जोहारान को हाराने के लिये इस्तेमाल किया. ” गो बॅक टू थर्ड वर्ल्ड ” यह संघ, भाजप स्टाईल नारा भी ट्रम्प ने दिया. इतना सब करने के बाद भी ट्रम्प, उसका प्रशासन, अमेरिका का उद्योग जगत जोहारान को हारा नहीं पाये. क्यू की जोहारान न्यूयॉर्क के विकास की बात कर रहा था.
           डेमोकक्ट्रिक पार्टी की उमेदवारी मिलते ही अपने खिलाप इस तरह का प्रचार किया जायेगा,उसकी कल्पना जोहारान और उसकी टीम को थी.तो उसका जबाब भी जोहारान और उसकी टीम के पास था. न्यूयार्क शहर के विकास का अजेंडा लेकर ये टीम उतरी थी. देश के राष्ट्रपती डोनाल्ड ट्रम्प के विरोध के बावजुद चुनाव लढना और जितना बहुत कठीण था. दुसरी बात उसका धर्म भी था. पर समजवाद का विचार इस सबपर भारी पडा. और नतिजा दुनिया के सामने है. भारतीय मूल का और समाजवादी विचारों का जोहारान दुनिया के सबसे बडे शहर का प्रथम नागरिक बना है.
           विजयी घोषित होते ही जोहारान ने न्यूयॉर्क की जनता को संबोधित किया. और कहा न्यूयॉर्क शहर सबका है. यह केवल कहने की बात नहीं है, ट्रम्प पिछले कही महिनो से भारत विरोधी जो नितिया अपना रहे है, ये उसको चॅलेंज है. ट्रम्प जो टेरिफ लगा रहे है , और भारतीयों के साथ जो व्यवहार कर रहा है, उसको भी खुला चॅलेंज है. जो ट्रम्प के लंगोटिया यार मोदी नहीं कर पाये. वो जोहारान ने कर दिखाने के संकेत अपने संबोधन मे दिये. अपने संबोधन मे उन्होंने गुठ निरपेक्ष देशो के नेता और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को याद किया. उनके विचार और नितियों को याद किया. और न्यूयॉर्क के जनता को बताया.
           पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचार कितने प्रासंगिक है और आज भी उसकी जरुरत है, ये बात अपने संबोधन मे जोहारान ने बतायी. १४_ १५ अगस्त १९४७ के मध्यरात्री भारत स्वतंत्र हुआ. तब लाल किल्ले से देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश को संबोधित करते वक्त जो भाषण दिया, वो भाषण ” नियती से करार ” के नाम से प्रसिद्ध है. यह भाषण दुनिया के राजनेतायों के प्रमुख भाषणों मे से एक है. अपने संबोधन मे नेहरू ने कहा…..
            इतिहास मे ऐसा क्षण आता है, मगर विरले आता है. हम पुराने से बाहर निकल नये युग मे कदम रखते है, जब एक युग समाप्त हो जाता है, जब एक देश की लंबे समय से दबी हुई आत्मा मुक्त हो जाती है ! यह संयोग ही है की इस पवित्र अवसर पर हम भारत और उसके लोगों की सेवा करने के लिये तथा सबसे बढकर मानवता की सेवा करने के लिये समर्पित होने की प्रतिज्ञा कर रहे है…. ! महापौरपद जीत के अवसर पर नेहरू का ये भाषण जोहारान को याद आया. और जाहीर तौर पर जोहारान ने नेहरू की बात भी रखी. यह बहुत हिंमतवाला काम है. दुनिया को आज भी नेहरू और उनके विचार ,नितिया इतनी प्रासंगिक लगती है, और हमारे देश के सत्ताधारी उठते बैठते नेहरू की आलोचना करते है. हर वक्त टिका टिपण्णी करते है. मोदी तो हर वक्त नेहरू को कोसते रहते है. ये करते रहेगे. नेहरू को समजने के लिये देशभक्त होना जरूरी है. नेहरू को परखने के लिये अक्कल होनी भी जरुरी है. और वो नहीं, तो नेहरू कैसे समज मे आएंगे. इसलिये जोहारान का ये संबोधन और नेहरू की बात करना मोदी और उसके गँग को एक तमाचा है.

संघ, भाजप की छोडो राज ठाकरे ने तो कुछ सिखना चाहिए….!

           अमेरिका मे महापौरपद केवल नाम का नहीं होता, बहुत सारे अधिकार होते है. अगर वो महापौर न्यूयॉर्क हो तो पुरे अमेरिका मे बहुत ही सन्मान का पद होता है. हमारे देश मे मुंबई के महापौर को भी सन्मान से देखा जाता है. मुंबई महानगरपालिका का चुनाव ३ साल से नहीं होने से यह पद रिक्त पडा है. अब चुनाव होने जा रहे है. पर इस पद पर कोई मुस्लिम चुनकर नहीं आना चाहिए, उसकी तयारी भी चुनाव की तयारी के साथ हो रही है. हिंदू मानसिकता के नेता इस तयारी मे लगे है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने इस बारे मे जाहीर वक्तव्य किया भी है. मुंबई मे २० प्रतिक्षत मुस्लिम समाज है. पर पिछले ५० साल से अधिक समय हो गया है, कोई मुस्लिम महापौर बना नहीं. इसका मतलब यही है की, हम दुनिया से बहुत पिछे है. धर्म और जाती से उपर उठकर मानवतावादी सोच से हम कोसो दूर है.
            बात सिर्फ न्यूयॉर्क की ही नहीं है. ब्रिटन की राजधानी लंडन शहर का भी महापौर सादिक खान एक मुस्लिम ही है. ब्रिटन की गृहमंत्री पाकिस्तान मिल्क की एक महिला है. ये घटना यही दर्शाती है की, दुनिया जात, धर्म से उपर उठकर सोच रही है, और प्रगती, विकास कर रही है. विदेशो मे भारतीय मूल के तरुण राष्ट्रपती, पंतप्रधान, महापौर और कई महत्त्वपूर्ण पदो पर विराजमान है. पर हमारे देश मे यह सोच नहीं है. हमारे देश के कुछ राजकीय दल और नेता तो हमारे देश के अन्य प्रांत के लोगों को भी पसंत नहीं करते. उनके साथ मानवता पूर्वक व्यवहार नहीं करते. हमे लंडन और न्यूयॉर्क के जनता से कुछ सिखाना चाहिए.
……………….

राहुल गायकवाड,
प्रवक्ता, महासचिव समाजवादी पार्टी,
महाराष्ट्र प्रदेश

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