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“शिक्षा, समर्पण और समाज के प्रति हमारा कर्तव्य”- एस के बेरी

शिक्षा, समर्पण और समाज के प्रति हमारा कर्तव्य”

अत्यंत हर्ष के साथ आपको सूचित किया जाता है कि * दिनांक 26 अप्रैल 2026 को प्रातः 10 बजे* माता रमाबाई अम्बेडकर बालिका छात्रावास का शिलान्यास होने जा रहा है।
यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन अनगिनत सपनों की नींव है, जो शिक्षा के माध्यम से साकार होने वाले हैं।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान अतुलनीय है। विपरीत परिस्थितियों में रहकर भी उन्होंने अपने जीवन को केवल स्वयं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संपूर्ण समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
जीवन लंबा नहीं, महान होना चाहिए।” — डॉ. बी. आर. अंबेडकर
आज हम जिस सुविधाजनक जीवन का आनंद ले रहे हैं, वह उनके संघर्ष का परिणाम है। यदि हम अपने जीवन से मात्र 0.0001% योगदान भी समाज को लौटा सकें, तो हजारों-लाखों बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।
वे बच्चे, जो आज भी दूरस्थ गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों में अभावों में जीवन जीने को मजबूर हैं—न सुविधाएँ, न मार्गदर्शन—वे ही हमारे देश का भविष्य हैं।
 ऐसे में हृदय में एक टीस सी उठती है
क्या हम मानवता के लिए आगे आकर इन बच्चों के लिए थोड़ा सा योगदान भी नहीं कर सकते?
क्या हम वास्तव में “Pay Back to Society”कर रहे हैं?
या फिर हम सक्षम होते हुए भी आँखें मूँदकर इस सच्चाई को नजरअंदाज कर रहे हैं?
डॉ. अंबेडकर द्वारा दिए गए अधिकारों के कारण ही आज हम ऊँचे पदों पर आसीन हैं। यह केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि हम पर उनका एक ऋण है—जिसे समय रहते चुकाना हमारा कर्तव्य है।
“मनुष्य महान अपने कर्मों से बनता है, जन्म से नहीं।” — डॉ. बी. आर. अंबेडकर
एक अकेला व्यक्ति हमारे लिए इतना कुछ कर गया—
तो क्या हम सब मिलकर समाज के लिए एक छोटा सा कदम भी नहीं उठा सकते?
हम सभी से विनम्र निवेदन है कि इस नेक कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें और बाबा साहेब के “Pay Back to Society” के संदेश को साकार करें।
यह छात्रावास हमारे लिए एक अवसर है
कि हम समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाएँ और जितना संभव हो सके, सहयोग करें।
शायद हम बहुत बड़ा योगदान न दे सकें, पर एक छोटा प्रयास भी किसी का पूरा भविष्य बदल सकता है।
“शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा।” — डॉ. बी. आर. अंबेडकर
शिक्षा ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को सशक्त और राष्ट्र को महान बनाती है।
हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें शिक्षा मिली—अब हमारा कर्तव्य है कि हम इस प्रकाश को दूसरों तक पहुँचाएँ।
यह छात्रावास केवल एक भवन नहीं, बल्कि आशा, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य का केंद्र है।
यहाँ से निकलने वाली हर बेटी अपने साथ समाज और देश को नई दिशा देगी।
 आइए , हम सब मिलकर इस पवित्र कार्य को सफल बनाएँ।
अधिक से अधिक सहयोग करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
“Be the change that you wish to see in the world.” — महात्मा गांधी
यही सच्चे अर्थों में बाबा साहेब को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
 
सुरेंद्र कुमार बेरी 
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