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ब्राह्मणी व्यवस्था और ब्राह्मणी मिडिया का षडयंत्र :

ब्राह्मणी व्यवस्था और ब्राह्मणी मिडिया का षडयंत्र :

डॉ. आंबेडकर, डॉ . लोहिया के सामाजिक न्याय आंदोलन और अजेंडे को बदनाम करने के लिये लालू राज को जंगल राज की उपाधी.....!!

बिहार चुनाव मे....वोट चोर, चुनाव चोर, प्रचारमंत्री नरेंद्र मोदी गद्दी छोड, नारे की धूम....!

        बदलो सरकार, बदलो बिहार इस मुख्य चुनावी मुद्देपर बिहार विधानसभा का चुनाव हो रहा. पहिले चरण का चुनाव प्रचार कल तक थम जायेंगा. राहुल गांधी, तेजस्वी यादव अखिलेश यादव और कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व मे जो ” वोट चोर, चुनाव चोर, नरेंद्र मोदी गद्दी छोड ” यात्रा से सुरू हो गया था. तब ही इंडिया गठबंधन ने एनडीए के खिलाप चुनावी बिगुल बजा दिया था. वैसे तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री कम चुनाव प्रचार मंत्री जादा रहे है. उन्होंने तो पहलगाम हमले के दुसरे ही दिन बिहार विधानसभा चुनाव का प्रचार सुरू किया था. पहलगाम मे 27 भारतीयों की आतंकवादियों ने हत्या की , और पुरा देश मातम मे डुबा था, तब प्रचारमंत्री नरेंदभाई मोदी चुनाव प्रचार करने के लिये बिहार पोहचे थे. ये सबको याद है. याद नहीं होगा, ऐसा एक भी भारतीय धुंडने से भी नहीं मिलेगा. चुनाव प्रचार मे सक्रीय होना और जनता को जूमले से मूर्ख बना देना नरेंद्र भाई मोदी का शौक रहा है.
      बिहार मे भले ही पिछले २० साल से नितीशकुमार की सरकार रही हो. पर राज्य मे लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय जनता दल का दबदबा कायम रहा है. हर बार, हर विधानसभा चुनाव मे भाजप वोट चोरी करने के बाद भी राष्ट्रीय जनता दल सबसे बडा दल रहा है. जेपी आंदोलन से निकले नितीशकुमार सत्ता के लिये कई बार पलटी मार चुके है. अब भाजप के साथ सरकार चला रहे है. अपने २० साल के शासनकाल मे राजद से मिलकर भी सरकार बना चुके है. तब भी आकडों की बात करे तो राजद का आकडा ही अधिक था. २०१०या २०१५ के विधानसभा चुनाव मे खुद्द को समाजवादी और कट्टर आंबेडकरवादी कहनेवाले रामविलास पासवान भाजप के साथ मिलकर वोट किटवा नहीं बनते, तो राजद अधिक जादा सीट पाती और सरकार भी बनाती. वही काम जीतनराम मांझीने डॉ. आंबेडकरवादी बोलकर किया. नितीशकुमार हो, चुनाव मौसम वैज्ञानिक रामविलास पासवान हो, उनके भाई….. पासवान हो, चिरंजीव और मोदी के हनुमान चिराग पासवान हो, या महा दलित की राजनीति की करनेवाले मांझी हो. ये सारे भाजप से साठगाठ नहीं करते, तो राजद कब की सत्तापर आती और बिहार मे भाजप कही की नहीं रहती. बिहार मे भाजप केवल दलाल आंबेडकरवादी और समाजवादीयों कारण जिंदा है. बिहार की धरती ने कभी कभी भाजप को साथ नहीं दिया. आज जो बिहार मे चुनाव हो रहा है, इसमे भी भाजप की हालत गंभीर है.
            बहुजन वर्ग के लिये लालू का राज वरदान साबित हुआ है. लालू का राज सामाजिक न्याय और समानता प्रतिक रहा है. लालू के राज मे सत्ता का पुरा का पुरा चेहरा बहुजनवादी बना था. पिछाडे ही नहीं, अति पिछाडे, दलित, महा दलित को भी सत्ता मे हिस्सेदारी मिली थी. वंचित समाज को सत्ता के मुख्य प्रवाह मे सामिल करने का जो दौर था, उसका ही नाम लालू राज है. पर यह सब ब्राह्मणी धर्म और मनुवाद के खिलाप था. इसलिये सामाजिक न्याय व्यवस्था स्थापित करने की इस ऐतिहासिक दौर को जंगल राज के नाम से परिभाषित करने का काम किया गया है. और वो आज भी निरंतर जारी है.
         जनता का विकास, हित के लिये इंडिया गठबंधन चुनाव लढ रहा है, तो भाजप के नेतृत्व मे एनडीए धर्म व्यवस्था को, धर्म के पाखंड को अधिक मजबूत करके धर्म, जाती के नामपर लोगों शोषण करने के लिये चुनाव लढ रहा है. अमित शहा, मोदी और योगी के भाषणो से यह स्पष्ट दिख रहा है. देश का प्रधानमंत्री मोदी को तो चुनाव प्रचार के दौरान भान भी नहीं रहता की, वो देश के प्रधानमंत्री है. इस चुनाव मे वो कट्टा, कनपट्टी, जुमले की बात करके अपने अनपढ होने के सबूत खुद्द दे रहे है. बिहार और उत्तर प्रदेश की अर्थ निती महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और दक्षिण भारत के राज्योंपर निर्भर है. और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी गाय, गोबर की राजनीति कर रहे है. साधू होकर कटेगे और बटेगे की बात करते है. धर्म की राजनीति करके नफरत का माहोल तयार करते है. आज बिहार चुनाव प्रचार मे जाकर भी योगी यही कर रहे है. अमित शहा तो खुद्द तडीपार रहे चुका है, और वो गुंडां गर्दी की बात करता है. जो उनके मूह से अच्छा नहीं लगता. जब तक मोदी, शहा और योगी का चरित्र पुरी तरह लोगों मालूम नहीं था. तब तक जरा ठीक था. पर अब सोशल मिडिया का जमाना है. जनता सबकूछ जान रही है. इसलिये पुरे बिहार चुनाव मे पहिले दिन से मोदी, योगी और शहा मजाक के पात्र बने हुये है.
           पहिले चरण का चुनाव प्रचार थम जाने के आखरी दिन तक भाजप के नेतृत्वावाले एनडीए खेमे मे चुनाव को लेकर टेन्शन है. हार के डर से ये खेमा डरा हुआ है.. मोदी तो सबसे जादा डरे है. क्यू की बिहार का चुनाव मोदी सरकार का भविष्य भी तय करनेवाला है. अगर बिहार मे भाजप हार जाती है, और तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बन जाते है, तो पलटूराम फिर पलट सकते है. भाजपने जो आऊटसोर्सिंग से पार्टी बनायी है , वो आऊटसोर्स भी ऍक्शन मे आयेगा, तो पार्टी तूट सकती है. और मुख्य डर यह है की, मोदी का डर खतम होते ही भाजप के मित्र पक्ष और अंतर्गत विरोधक भी ऍक्शन मे आ सकते है. इसलिये यह चुनाव मोदी, शहा और योगी के केवल राजनैतिक भविष्य का फैसला करनेवाला नहीं है. बल्की उनके जेल जाने का भी फैसला इस चुनाव के नतिजे तय करेंगे. मोदी, शहा और योगी को यह मालूम भी है, इसलिये चुनाव प्रचार मे भी वो डरे हुंये है. और बिहार की जनता भी हर जगह उनको विरोध कर रही है. चुनाव प्रचार सभा और रैलीया फ्लॉफ हो रही है. यह साफ दिख रहा है. अगर इतना होने के बाद भी भाजप और एनडीए जीतती है, तो वो चुनाव और वोट चोरी से ही जीत सकते है.
           जनता का रझान देखकर राष्ट्रीय जनता दल और इंडिया गठबंधन बिनधास्त चुनाव लढ रहा है. हार का डर नहीं है. जनता पर विश्वास है. और इस बार के चुनाव को देखा जाय तो ये चुनाव जनता ने ही अपने हात मे लिया है. तेजस्वी यादव का नाम मुख्यमंत्री पद के लिये घोषित होने के साथ ही बिहार के हर नौजवान को लगने लगा है की वो खुद्द मुख्यमंत्री बन रहा है. गोदी मिडिया इस चुनाव मे मोदी और एनडीए के पक्ष मे खुलेआम चुनाव प्रचार कर रही है, तो बिहार की जनता और सोशल मिडिया गोदी मिडिया को खुलेआम नंगा कर रहा है. वैसे तो बिहार मे जब जब चुनाव होता है, तो सारे देश मे उसकी ही चर्चा होती है. इस बार भी हो रही है. पर इस चुनाव मे मनोरंजन भी हो रहा है. चुनाव के मुद्दो मे इसबार सांस्कृतिक दर्शन अधिक दिख रहा है. और उसका कारण सोशल मिडिया और रील बनानेवाले कलाकार है. बाकी चुनाव के नतीजे १४ तारीख को आएंगे. पर तेजस्वी यादव एकमात्र बिहार का नेता है, यह पहिले चरण का प्रचार खतम होते होते स्पष्ट हो रहा है.

जनसंघ और भाजप नफरत फैलानेवाले राजनैतिक दल ….

         बाकी 1951 मे स्थापित भारतीय जनसंघ हो या 1980 बनी भारतीय जनता पार्टी हो, ये सांप्रदायिक पार्टीने चुनाव मे आम जनता के मुख्य मुद्दोसे हमेशा से ही जनता का ध्यान भटकाकर धार्मिक मुद्योंपर चुनाव लढ रही है. आज भी लढती है. और बिहार विधानसभा का चुनाव भी लढ रही है. राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्ववाला इंडिया गठबंधन रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, सिंचाई , किसानो का हित, बहू बेटीयों का रक्षण, संरक्षण, गरिबों को पक्के मकान, सर्व समाज को भागीदारी, हिस्सेदारी, आरक्षण और संविधान, लोकतंत्र के बचाव के मुद्दोंपर चुनाव लढ रहा है, तो मोदी, अमित शहा के नेतृत्व मे भाजप और NDA गठबंधन सांप्रदायिक मुद्दों को चुनावी मुद्दे बना रहा है. यह साफ तौर पर दिख रहा है. ये मुद्दे समाज मे नफरत फैलाने का और समाज को बाटने का काम करते है. संघ, भाजप और मोदी का असली मकसद भी यही रहा है.
          देश की कोई राजनीतिक पार्टीया बेरोजगार को सरकारी नोकरी देने का वादा करती है, पर वादोपर खरे नहीं उतरते. मगर बिहार का एकमात्र नेता है, तेजस्वी यादव जिसने अपने 17 महिने के सत्ताकाल मे उपमुख्यमंत्री रहते हुंये लाखो रोजगार भी दिये है, इसलिये रोजगार देने के तेजस्वी यादव के नियतपर सवाल खडा करनेवाले सारे के सारे बेईमान है. रोजगार नीती के विरोधी है. अगर सरकार चाहती है, तो क्या संभव नहीं है ? बिहार विधानसभा के चुनाव मे राष्ट्रीय जनता दल के नेता और इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्रिपद के उमेदवार तेजस्वी यादव रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, सिंचन, किसानो का हित, महिला संरक्षण,आरक्षण, संविधान और लोकतंत्र बचाव के मुद्दे पर बात कर रहे है. अगर धार्मिक मुद्दों की बात करे तो राष्ट्रीय जनता दल की सरकार सत्ता मे आती है, तो गया स्थित बौद्ध समाज का धार्मिक स्थल महाबोधी महाविहार का ताबा बौद्ध समाज को देने का वादा भी तेजस्वी यादव ने किया है. किसी चुनाव यह मुद्दा पहिली बार बना है. बौद्ध धर्म का यह धर्मस्थल ब्राह्मणों के कब्जा मे है. तेजस्वी यादव ने यह बडा कदम उठाया है. ब्राह्मणी धर्म व्यवस्था और संघ के हिंदू राष्ट्र निर्माण के विरोध मे उठाया गया ये बहुत बडा कदम है. चुनाव परिणामो मे उसका क्या असर पडेगा, उसकी पर्वा किये बिना यह मुद्दा तेजस्वी यादव ने उठाया है. ऐसे मुद्दे उठाने हिंमत होना जरूरी है, जो तेजस्वी यादव के पास है.
          दलित, पिछाडे, आदिवासी और अल्पसंख्यांक समाज को सत्ता मे भागीदारी, हिस्सेदारी देने का काम बिहार मे करप्युरी ठाकूर के बाद लालू प्रसाद यादवजीने १९९० मे मुख्यमंत्री बनने बाद किया. बिहार विधानसभा, बिहार मंत्रिमंडळ और बिहार का राजकीय चेहरा ही बदलने काम लालूजीने किया. सामाजिक न्याय का रुका हुआ रथ लालूजीने केवल बिहार मे ही नहीं दौडाया बल्की पुरे देश मे दौडाया. उनकी प्रेरणा से पुरे देश मे सामाजिक न्याय के आंदोलन ने जोर पकडा. इसलिये पिछाडा, दलित आदिवासी और अल्पसंख्यांक समाज लालूजी को अपना मसिहा मानता है. भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया जी के सामाजिक न्याय की लढाई लालूजीने फिर से सुरू करते ही देशभर मे सत्ता का चेहरा बहुजनवादी हो गया. १९९० के पहिले सत्ता का चेहरा ब्राह्मणी रहा है, तो १९९० के बाद का चेहरा बहुजनवादी रहा है. स्वतंत्र भारत के इतिहास की ये ऐतिहासिक और बहुत क्रांतिकारी घटना है. पर इस देश के ब्राह्मणी मिडिया और ब्राह्मणी व्यवस्थाने इतना दुष्प्रचार किया की,लालू राज को जंगल राज की उपाधी दे दी. सामाजिक न्याय के आंदोलन और अजेंडे को बदनाम करने की ये एक साजिस है. और उसका प्रचार आज भी किया जा रहा है.
          १९९० से १९९७ तक लालूजी बिहार के मुख्यमंत्री रहे. फिर राबडी देवी मुख्यमंत्री रही. २००५ से नितीश कुमार मुख्यमंत्री है और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख विपक्षी दल. पिछले २० वर्ष मे बिहार मे कुछ भी नहीं हुआ. १० हजार की नोकरी पाने के लिये बिहार का तरुण अपना वतन छोडकर महाराष्ट्र, गुजरात जैसे अन्य राज्यो मे जा रहा है. शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, उद्योग सिंचाई की हालत खराब है. महिला, दलित और अल्पसंख्यांक समाजपर अत्याचार मे बिहार अव्वल स्थानपर है.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के धरतीपर अखिलेश आये है…. गाने ने हराम की संघ, भाजप और मोदी की निंद……

बिहार मे इसबार जो चुनाव हो रहा है, वो संविधान और लोकतंत्र विरोधी शक्तीयों को सत्ता से बेदखल करने के लिये हो रहा है. देश को दिशा देकर सही मार्ग पर लाने के लिये हो रहा है. लोकतंत्र और संविधान बचाने के हो रहा है. सर्व समाज को विकास के मुख्य प्रवाह मे लाने के लिये हो रहा है. सबको भागीदारी और हिस्सेदारी देने के लिये हो रहा है. किसान को न्याय देने के लिये और नौजवान को रोजगार देने के लिये हो रहा है. महिला सुरक्षा के लिये हो रहा है. शिक्षा और चिकित्सा के लिये हो रहा है. इस चुनाव की और एक विशेषता है की, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादवने संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता विरोधी संघ, भाजप, मोदी और योगी के नाक मे दम लाकर छोडा है. अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को प्रदेश के नेता से उपर उठाकर देश के नेता बनाने के लिये हो रहा है. और जिस तरह बिहार की जनता ये दो नेतायों का स्वागत कर रही, इससे यह साबित भी हो रहा है की, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव अब केवल बिहार युपी और यादवों के नेता नहीं, ये देश के और सर्व बहुजनों के नेता है. बिहार चुनाव मे एक गाना बहुत वायलर हुआ है और धूम मचा रहा है. मोदी, शहा की निंद भी हराम कर रहा है. वो गाना है…..

युपी से मोहब्बत का संदेश लाये है
परिवर्तन लाने को ये कदम बढाये है
तेजस्वी यादव को अब जीत दिलाने को
जेपी की धरतीपर अखिलेश आये है,
अखिलेश झिंदाबाद, तेजस्वी झिंदाबाद….!!
……………

राहुल गायकवाड,
प्रवक्ता, महासचिव समाजवादी पार्टी,
महाराष्ट्र प्रदेश

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