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चोरी केवल चढावा की नहीं है, सौ करोड से जादा हिंदू समाज की भावना और आस्थायोंपर डाला हुआ डाका है….!
राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट हिंदु समाज का नहीं , ब्राह्मण समाज का है, इसलिये चढावा, आभूषण चोर भी हिंदू नहीं, ब्राह्मण ही है....!!
राम मंदिर का चढावा चोरी, प्रभू रामचंद्र के आभूषण की चोरी, दान चोरी, सोने की रामायण चोरी हुई है, अगर चौकीदार ही चोर होगा, तो चोरी तो होगी ही. हुआ भी यही. शेकडो कॅमेरे होने के बावजुद, सुरक्षा का चोख बंदोबस्त होने के बावजुद चोरी होती है, तो चोर बाहर का नहीं अंदर का ही होता है, और हुआ भी यही. मुख्य चौकीदार ने जिसको जिसको राम मंदिर मे चौकीदार बनाया उन्होंने ही चोरी की और माल मुख्य चौकीदार दिया. यह केवल चढावा, दान, आभूषण की चोरी नहीं है, तो देश के सो करोड से अधिक हिंदू समाज की भावना और आस्थायोंपर संघ, भाजप और राम मंदिर तीर्थ ट्रस्टने डाला हुआ डाका है. हिंदू समाज की भावना और आस्था को कुछलने का काम इन चोरों ने सोची, समजी निती के तहत किया है. अगर ऐसे वक्त हिंदू समाज जाग नहीं जायेंगा, चोरों को सबक नहीं सिखायेंगा, तो हिंदू समाज को प्रभू रामचंद्र भी नहीं बचा पायेंगे. क्यू की चोर भगवान राम से चलाख है. पहिले राम के नाम से सत्ता हासिल की, और जैसे ही सत्ता मिली तो दावा किया की राम को हमने लाया है. यह कहकर राम को छोटा दिखाया. अब मंदिर की लुटमार सुरू है. सुरू ही रहेगी. क्यू की हिंदू समाज के मेंदू की नसबंदी करके उसकी सोच को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजप और साधू, संतोंने मार डाला है. इसलिये ही अपनी भावना और आस्था को चोट पोहचानेवालों के खिलाप हिंदू समाज आज भी कुछ नहीं बोलता. कुछ भी नहीं करता और खडा भी नहीं होता दिख रहा है. कुछ नहीं करने से और कुछ नहीं बोलने से आदमी मर जाता है. वैसी ही हिंदू समाज मर गया है. उसे मार दिया है.
राम मंदिर चोरी प्रकरण उजागर होने के बाद विपक्ष दल के साथ साथ जो भी चोरी के बारे मे सवाल खडे कर है, उन्हे हिंदू विरोधी होने के आरोपों का सामना करना पड रहा है. ” चोर तो चोर फिर शिरजोर, ” यह कहावत इस समय सही मायने मे लागू हो रही है. इस चोरी के बाद यह भी साबित हुआ है की, राम मंदिर तो एक बहाणा था, असली मकसद तो लूट का था. जो मंदिर बनाने के साथ ही पुरा हुआ है. यह लूट या लुटमार राम मंदिर बनाने के बाद की नहीं है. राम के नाम से लुटमार तो शेकडो सालों से सुरू है. राम मंदिर आंदोलन मे कर सेवा के नाम से जो नंगानाच देश मे हुआ है उसका भी एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा लूट ही था. देश विदेश से पैसा जमा किया गया. वो सारा पैसा किसके पास है, उसका क्या हुआ, उसके बारे मे भी कोई कुछ नहीं पुछता. वो सारा पैसा गायब किया है. आज भी यही हो रहा है. मंदिर मे चढावा, आभूषण और सोने से बनी रामायण गायब है. यह चोरी ट्रस्ट के नियंत्रण मे हुई है. अब आठ कर्मचारीयोंपर गुन्हा दाखल करके असली चोरों बचाया जा रहा है. और मजे की बात तो यह है की गुन्हे की जाच भी देश के सबसे बडे गुन्हेगार, लुटेरे अमित शहा और मोदी के नियंत्रण मे ही हो रही है. तो समजो की भगवान प्रभू रामचंद्र को न्याय कैसे मिल सकता है.
बाबरी मशीद के स्थानपर राम जन्मभूमी थी की नहीं अदालत मे साबित नहीं हुआ. पर देश के बहुसंख्य हिंदुयों की भावना और आस्था के आधारपर ही फैसला हुआ और राम मंदिर बन गया. जब से फैसला आया है तब से लूट का धंदा चल रहा है. मंदिर के आसपास की जमीन मे मोदी सरकारने हस्तक्षेप करके बेच दिया. इस लूट के धंदे मे संघ, भाजप से संबंधित नेता और साधू, संन्यासीयों का हात रहा है. इतना ही नहीं अयोध्या स्थित भारतीय सेना की आरक्षित १३०० एकर जमीन भी मोदीने बेच दी. अब राम भक्तोने मंदिर मे चढावे मे जो भी दिया उसकी भी लूट सुरू है. अगर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस चोरी के बारे मे कुछ बोलते नहीं, तो आज भी खुलेआम चोरी सुरू ही रहती.
दुनिया मे बहुत सारे धर्म और उनके धर्म स्थल है. पर अपने देश मे धर्म की राजनीति जिस तरह से होती है, वैसे कही नहीं होती. धर्म स्थल को यहा जैसे लुटा जाता है, वैसे कही नहीं लुटा जाता. और धर्म के हिंदू समाज के जैसा मूर्ख समाज भी दुनिया मे कही नहीं है. अपनी भावना, आस्था पे धर्म के ठेकेदार ही डाका डाल रहे है, वो खुलेआम दिख भी रहा है, और समाज चूप है. इतना ही नहीं प्रभू के मंदिर से हुई चोरी का खुलेआम समर्थन भी हो रहा है. जिसने मंदिर बनवाया उसे लुटने का हक्क भी है, यह भी कहा जा रहा है. लूट को सही ठहराया जा रहा है. और देश का सारा हिंदू समाज यह मौन है. ऐसे समाज को जीवित समाज नहीं कहा जा सकता.
चोरी हुई है यह साबित हुआ. चोरी के आरोपपत्र भी दाखिल हुये, पर असली चोरों को बचाया जा रहा है. राम मंदिर तीर्थ ट्रस्टने ही चोरी की है. पर असली चोर तो नागपूर और दिल्ली मे बैठे है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री ही मुख्य चोर है. क्यू की ट्रस्ट उन्होंने बनवाया है. ट्रस्ट का हर सदस्य भागवत और मोदी का है. ट्रस्ट का चयन इन दोन्हो ने ही किया है. और उनके ही इशारों पर यह लुटमार भी हुई है, तो गुन्हा भी भागवत और मोदी के उपर ही होना चाहिए. जिम्मेदारी तो उनकी ही है.
….. तो हिंदू समाज संघ, भाजप के विरोध मे खडा होगा….!
संघ ही हिंदू जागरण की मोहीम देश और विदेशो मे भी चला रहा है. ” बटोंगे तो, कटगो ” यह डर दिखाकर हिंदू समाज को एकजूट भी कर रहा है, और संघ ही हिंदू समाज की भावना और आस्थापर डाका भी डाल रहा है, खिलवाड भी कर रहा है. संघ की यह दोहरी निती केवल सत्ता हासिल करने के लिये है. हिंदू समाज के हित के लिये नहीं, यह हिंदू क्यू नहीं समज रहा है ? सवाल तो यह पैदा हो रहा है. हिंदू समाज को सही मायने मे जागृत होकर सोचना चाहिए की, हिंदू समाजाने सोचना तो यह चाहिए की क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनके हित और कल्याण के लिये बना हुआ संघटन है ? भाजप और मोदी सरकार उनके हित और कल्याण के लिये काम कर रही है ? अगर ये हिंदू समाज अपने अंतरात्मा से सोचेगा, तो वो संघ और भाजप के विरोध मे खडा होगा. उसे ये दोनो संघटन अपने नहीं लगेगे. क्यू की संघ की विचारधारा कभी भी हिंदू समाज की पक्षधर नहीं रही. संघ की विचारधारा ना हिंदू विचारधारा है, ना वो हिंदूत्व की पक्षधर है. संघ की विचारधारा ब्राह्मणी विचार और व्यवस्था की प्रतिनिधित्व करती है. यह विचारधारा, व्यवस्था देश के ३% प्रतिशत ब्राह्मण समाज के वर्चस्ववाद की विचारधारा रही है. और संघ जिस हिंदू की बात करता है, वो सारे हिंदू समाज को ब्राह्मणी व्यवस्था का गुलाम मानता है. राम मंदिर चोरी के बाद यह साबित हुआ है. उसे समजने की जरूरत है.
राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट के सदस्य और पदाधिकारीयों के नामोपर नजर डालो तो पता चलेगा की, ब्राह्मणी व्यवस्था के पक्षधर संघ और भाजप के नजर मे हिंदू समाज की औकात क्या है. राम मंदिर के लिये संघर्ष, आंदोलन हिंदू समाजने किया, गोलिया भी उसने खाई. कारसेवा भी उसने की. पर जब मंदिर बना तब हिंदू समाज कही नहीं दिखा. विनय कटिहार को ट्रस्ट मे स्थान नहीं मिला. ट्रस्ट मे ब्राह्मणों के शिवा कोई नहीं है. इतना ही नहीं मुलायमसिंह को बदनाम करने उनके प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्राने कारसेवकोंपर गोली चलाने का आदेश दिया था, उसे भी मोहन भागवत और मोदीने ट्रस्ट मे सामिल किया है. संघ भाजप का पुरा चरित्र हिंदू विरोधी रहा है.
राम मंदिर की चोरी देश की पहिली चोरी नहीं है. हर मंदिर की यही कहानी है. चोरी और लुटमार करने लिये ही मंदिर बनाये जाते है. इतिहास के पन्नो मे भी मंदिरों के चोरी के उदाहरण मिलते है. देशपर जब विदेशी राजवट थी, तब बहुत सारे मंदिरों को लुटा गया. और उस लूट के पिछे भी आज के लुटारों के पूर्वज ही विदेशी आक्रमणकारियों के सलाहकार थे. संघ जिस हिंदू राष्ट्र के आड मे ब्राह्मण राज की बात करता है, वो ब्राह्मणी व्यवस्था ऐसे लूट के लिये ही बनी भी है और टिकी भी है. अगर राम मंदिर चोरी के खिलाप आवाज नहीं उठेगी, असली चोर पकडे नहीं जायेंगे, और उन्हे सही सजा नहीं मिलेगी, तो उनका हौसला बढ जायेंगा. और वो ऐसे ही चढावा चोरी करते रहेगे, हिदुयों के भावना और आस्था पर डाका डालते रहेगे. देश के सो करोड से जादा हिंदू समाज के सोच को मारकर ही देशपर राज किया जा सकता है, देश को लूटा जा सकता है, यह संघ को मालूम है. इसलिये संघ और भाजप “हिंदू खतरे मे है,” यह डर दिखाकर और हिंदू मुस्लिम की राजनीति करके अपनी राजनैतिक रोटी शेक रहा है
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राहुल गायकवाड,
समाजवादी पार्टी
मुंबई/महाराष्ट्र प्रदेश