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वतन के रखवाले ( खासदार)

वतन के रखवाले ( खासदार)

लोकतंत्र में जनता सार्वभौम
ना जाती नाधर्म ना पंथ नाही कौम
जनता के प्रतिनिधि वतन के रक्षक
देश जनता के हित के हो वह समर्थक

सार्वजनिक हित सबको समान संधी
कमान जिसके हात,नियत ना ‌हो गंदी
भेदभाव ना हो कीसीपर कोई पाबंदी
संविधान लोकतंत्र की हो रजा मंदी

संविधान कानून का हो पालन
खासदार से देश कार्य परिचालन
आपकी आशा आकांक्षा निर्धारण
ईसिलीये उनका चुनाव,हो जाता असाधारण

भलेही हो पांच साल की हो बात
भविष्य से ना हो विश्वासघात
जीवन पर कभी भी हो सकता आघात
ईसिलीये वर्तमान की करो बात

एक आदमी एक वोट समानता
आपही हो आपके भविष्य निर्माता
वोट देने से पहले विवेक से रखो वास्ता
देश हित चुनना है, पहले देश से है रिस्ता

– वसंत गवळी गोंदिया

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